भारत से फिर हारा पाक (कुलभूषण जाधव)

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भारत से फिर हारा पाक (कुलभूषण जाधव), ICJ hearing and reactions after it concluded in Kulbhusan Jadhav case as below:

जज ने फैसले में इन बातों का जिक्र किया

1. ” जाधव को 3 मार्च 2016 को गिरफ्तार किया गया था। जानकारी 25 मार्च को दी गई। भारत ने कॉन्स्यूलर एक्सेस मांगा और कई बार इसे दोहराया। 4 अप्रैल 2017 को पाकिस्तान के फॉरेन ऑफिस ने प्रेस रिलीज में बताया कि जाधव को मिलिट्री कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है।”

2. “भारत ने विरोध किया। जाधव को पाकिस्तानी कानून के मुताबिक, 40 दिन में सजा के खिलाफ अपील करनी थी, लेकिन ये हुआ या नहीं? कोर्ट को इसकी जानकारी नहीं है।” 3. ” जाधव की गिरफ्तारी को लेकर डिस्प्यूट हैं। इसे ध्यान में रखना होगा। भारत और पाकिस्तान दोनों वियना कन्वेंशन का हिस्सा हैं।”

4. ” पाकिस्तान के ऑब्जेक्शंस पुख्ता नहीं हैं। लिहाजा इन पर विचार नहीं किया जा सकता। लेकिन ये भी ध्यान रखना होगा कि इस मामले में दोनों देशों के बीच म्युचुअल ट्रीटी (आपसी समझौता) है। इसे 2008 में रिव्यू भी किया जा चुका है।”

5. ” वियना कन्वेंशन के मुताबिक, ये जरूरी है कि सभी सदस्य देश एक-दूसरे नागरिकों को हर हाल में कॉन्स्यूलर एक्सेस मुहैया कराएं।”

6. ” भारत को ये अधिकार है कि वो कॉन्स्यूलर एक्सेस के लिए अपील करे। पाकिस्तान कोर्ट का आखिरी फैसला आने तक जाधव को सजा नहीं दे सकता।”

7. “जाधव को दया याचिका दायर करने का हक है और सिविलाइज्ड सोसायटी में हर देश को पहले से तय नतीजे पर सजा देने का अधिकार नहीं है। पाकिस्तान कोर्ट को ये बताए कि उसने कोर्ट के दिए ऑर्डर पर क्या एक्शन लिए। इस केस की मैरिट के आधार पर सुनवाई होगी। दोनों देशों की सरकारों को आगे के लिए अपने जवाब कोर्ट देंगे।”

क्या है वियना कन्वेंशन?- वियना कन्वेंशन 1963 में अलग-अलग देशों के लोगों को विदेशों में कॉन्स्यूलर एक्सेस देने के लिए बना था।- कन्वेंशन के आर्टिकल 36 के तहत अगर किसी देश में विदेशी नागरिक क्रिमिनल या इमिग्रेशन आरोपों में हिरासत में लिया जाता है या अरेस्ट किया जाता है, तो उसे कॉन्स्यूलर एक्सेस पाने का हक है। यानी वह अपने देश के दूतावास से संपर्क कर सकता है।- उस शख्स को ट्रायल और हिरासत के दौरान सलाह-मशविरे के लिए कॉन्स्यूलर अफसरों से मिलने का भी हक है। – पाक का दावा है कि आर्टिकल 36 के तहत जाधव को कॉन्स्यूलर एक्सेस नहीं दिया जा सकता क्योंकि उस पर आतंकवाद और जासूसी के आरोप हैं।- इंटरनेशनल कोर्ट ने साफ कर दिया कि आर्टिकल 36 में ऐसा कहीं नहीं लिखा कि आतंकवाद या जासूसी के आरोपों का सामने कर रहे विदेशी नागरिकों को कॉन्स्यूलर एक्सेस नहीं मिल सकता।

18 साल पहले भारत-पाक इंटरनेशनल कोर्ट में थे आमने-सामने- 10 अगस्त 1999 को इंडियन एयरफोर्स ने गुजरात के कच्छ में पाकिस्तान नेवी के एक एयरक्राफ्ट एटलांटिक को मार गिराया था। इसमें सवार सभी 16 सैनिकों की मौत हो गई थी।- पाकिस्तान का दावा था कि एयरक्राफ्ट को उसके एयरस्पेस में मार गिराया गया। उसने इस मामले में भारत से 6 करोड़ डॉलर  मुआवजा मांगा था। ICJ की 16 जजों की बेंच ने 21 जून 2000 को 14-2 से पाकिस्तान के दावे को खारिज कर दिया।

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