अनसुलझे रहस्य || Unsolved Mysteries

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अनसुलझे रहस्य || Unsolved Mysteries

दुनियाभर में ऐसे कई रहस्य हैं, जिन्हें आज तक सुलझाया नहीं जा सका है।इन रहस्यों के जवाब किसी साइंटिस्ट के पास भी नहीं है। इनमें किसी के मौत पर संशय बना हुआ है तो किसी की पहचान पर। ऐसे में आज हम आपको 10 ऐसी ही मिस्ट्री के बारे में बताने जा रहे हैं, जो दुनिया के सामने अब तक अनसुलझी पहेली बनी हुई है।

इस खूबसूरत रानी की मौत आज भी बनी हुई है मिस्ट्री…

मिस्त्र की रानी क्लियोपेट्रा

अपनी खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती थीं। इनकी मौत महज 38 साल की उम्र में हुई थी। लेकिन क्लियोपेट्रा की मौत आज भी मिस्ट्री बनी हुई है। इनके मौत के पीछे लोगों के अलग-अलग तर्क हैं। किसी का कहना है कि एक्टिउम की जंग में हारने के बाद वो इतनी टूट गई थी कि उसने खुद को सांप से डसवा लिया। जबकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि हार के बाद ऑगस्टस ने क्लियोपेट्रा की हत्या कर दी। हालांकि, सच्चाई क्या है ये कोई नहीं जानता।

द स्क्रीमिंग ममी

मिस्त्र में सदियों से परंपरा रहा है कि वहां पर मरने के बाद लोगों को ममी बनाकर दफना दिया जाता था। लेकिन सन् 1886 में वहां एक ममी मिली, जो मरने के बाद भी लग रही थी कि जिंदा है। उसे देखने के बाद ऐसा लग रहा था कि मानो वो दर्द से कराह रहा हो। इतना ही नहीं इसमें ह्यूमन ऑर्गन भी मौजूद थे। लोगों का ऐसा मानना है कि इसे या तो जिंदा दफना दिया गया था फिर जहर दे दिया गया था। हालांकि, इस रहस्य से अब तक पर्दा नहीं उठ सका।

जैक द रिपर

लंदन के रहने वाले जैक को सीरियल किलर के रूप में जाना जाता था। जैक ने इस्ट लंदन में पांच महिलाओं की निर्मम हत्या कर दी थी। लेकिन उसकी शक्ल कोई नहीं देख पाया था। इसके ऊपर कई फिल्म और किताबें लिखी गई, लेकिन उसके चेहरे की गुत्थी को कोई नहीं सुलझा पाया।

द डेविल फूट प्रिंट्स

साउथ वेस्ट इंग्लैंड के डेवोन में 19वीं सदी में करीब 40 मील तक जमे बर्फ पर एक अजीबोगरीब निशान देखे गए थे। इसका रहस्य आज तक सुलझाया नहीं जा सका है। कई लोगों का मानना था कि ये कंगारुओं के पैर के निशान हैं, तो कइयों को ये कहना था कि यहां से दानव होकर गुजरे हैं।

बेबीलोन हैंगिंग गार्डन

बेबीलोन हैंगिंग गार्डन की गिनती दुनिया के सात अजूबों में होती है। कई इतिहासकारों का मानना है कि 450 बीसी में यह गार्डन 300 फीट ऊंचा और 56 मील चौड़ा था। यह देखने में बेहद ही खूबसूरत था। लेकिन मार्डन पुरातात्विक के कुछ लोगों ने जब इस जगह को देखा तो इराक में उन्हें इस गार्डन का अवशेष मिला, जबकि भूकंप और लड़ाई के दौरान इसका अस्तित्व खत्म हो गया था।

अमेरिका में स्टोनहेन्ज

अमेरिकी राज्य जॉर्जिया की एल्बर्ट काउंटी में ग्रेनाइट के विशाल पत्थरों को स्टोनहेन्ज कहा जाता है। इन पर आठ भाषाओं अंग्रेजी, स्पेनिश, स्वाहिली, हिन्दी, हिब्रू, अरबी, चाइनीज और रशियन में लिखी लाइनें अनसुलझी पहेली हैं। स्मारक की तरह ये पत्थर ऐसे खड़े हैं, जैसे इनकी कोई खगोलीय विशेषताएं हों। 1979 में खोजे गए पत्थरों पर लिखी लाइनों का अब तक कोई अर्थ समझ नहीं आया है। यह भी रहस्य बना है कि इन पर किसने लिखा था।

कजाकस्तान की अजीबोगरीब आकृतियां

कजाकस्तान के तुरगई रीजन में बनी अजीबोगरीब आकृतियां (Geoglyphs) भी रहस्य का मुद्दा बनी हुई हैं। माना जाता है कि ये आकृतियां 8,000 साल पुरानी सभ्यता की निशानी हैं और इन्हें नोटिस नहीं किया गया। एक्सपर्ट्स इन्हें लैटिन अमेरिकी देश पेरू की ‘नाज्का लाइन्स’ जैसा बताते हैं। वहीं, यूएफओ हंटर्स इसे एलियंस से जोड़कर देख रहे हैं।

पेरू की नाज्का लाइन्स

पेरू की राजधानी लीमा से 321 किमी दूर है नाज्का लाइन्स। इस जगह पर 59 किमी क्षेत्र में ऐसी समानांतर रेखाएं बनी हैं, जो एक दूसरे को काटकर हमिंग बर्ड, बंदर और मकड़ी की आकृतियां बनाती हैं। 1930 में खोजी गई ये रेखाएं क्यों बनाई गईं और इनका अर्थ क्या है, यह एक रहस्य है। लेखक एरिक वॉन डेनिकन का कहना है, ये रेखाएं एलियन के स्पेसक्राफ्ट से बनी हैं। कई विशेषज्ञों के मुताबिक इन्हें प्राचीन युग में खगोलीय उद्देश्यों से बनाया गया था।

30 करोड़ साल पुराना लोहे का पेंच

1998 में रूसी वैज्ञानिक दक्षिण-पश्चिम मॉस्को से करीब 300 किलोमीटर दूर एक उल्का के अवशेष की जांच कर रहे थे। इस दौरान उन्हें एक पत्थर का टुकड़ा मिला, जिसमें लोहे का पेंच संलग्न था। भूवैज्ञानिकों के मुताबिक, ये पत्थर 300 मिलियन (30 करोड़) साल पुराना है। तब न तो कोई प्रबुद्ध प्रजाति हुआ करती थी और न ही धरती पर डायनासोर हुआ करते थे। पत्थर के बीच लोहे का पेंच साफ दिखाई पड़ता है। इसकी लंबाई एक सेंटीमीटर और व्यास तीन मिलीमीटर है।

एटर्नली बर्निंग लैंप

एटर्नली बर्निंग लैंप की खोज मिडिल एज में की गई थी। बताया जाता है कि करीब हजारों साल तक यह लैंप बिना तेल के ही लगातार जलता रहा। पहली बार इस तरह के लैंप इंगलैंड, नार्थ अमेरिका, चीन और इजिप्ट में मिला था। यह लैंप इतने सालों तक कैसे जलता रहा, ये आज तक रहस्य बना हुआ है।

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